December 24, 2020

तुझे जीना होगा - सविता पाटिल | हिंदी कविता

तुझे जीना होगा तुझे जीना होगा - सविता पाटिल

इन लम्हों को बीतने दे जो प्रलय उठा है जीवन में उसे थमने दे यहाँ कुछ भी तो शाश्वत नहीं फिर किस बात से तू आश्वत नहीं इस कठिन दौर को भी तो गुजरना होगा उस प्रत्यय निमिष(क्षण) के लिए... आज इस हूक को सहना होगा हाँ, तुझे जीना होगा जब डूब रहा हो मन किसी अंधकार में वृथा हो रहे हो प्रयास जीवन उबारने में टूट रहा हो हृदय हर बार टकराकर संसार-पाषाण से और चुभ रहे हो कई श्रृंगी शब्द सीने में किसी बाण से इस क्षुभित(अशांत) क्षण को भी तो कभी मौन होना होगा उस संभव निमिष के लिए आज इस हूक को सहना होगा हाँ, तुझे जीना होगा थक्कर थम रहे है कदम तो गैर क्या है? हासिल होगी मंजिले भी है जीवन अगर तो इसमें देर क्या है? करना ही है मुकाबला तो खुद से कर रहने दे चकाचौंध दुनिया की वहीं पहले खुद को भीतर से रोशन कर इस घने तिमिर से कभी तो किरणों को फूटना होगा उस धवल निमिष के लिए आज इस हूक को सहना होगा हाँ, तुझे जीना होगा

संघर्ष और सफलता कविता