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है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है - हरिवंशराय बच्चन
जो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ है - केदारनाथ अग्रवाल
खीचों राम-राज्य लाने को, भू-मंडल पर त्रेता - माखनलाल चतुर्वेदी
सूर्य ढलता ही नहीं है - रामदरश मिश्र
तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार - शिवमंगल सिंह सुमन
आग की भीख - रामधारी सिंह दिनकर
बहुत दिनों के बाद - हरिओम पंवार