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खीचों राम-राज्य लाने को, भू-मंडल पर त्रेता - माखनलाल चतुर्वेदी
सूर्य ढलता ही नहीं है - रामदरश मिश्र
तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार - शिवमंगल सिंह सुमन
आग की भीख - रामधारी सिंह दिनकर
बहुत दिनों के बाद - हरिओम पंवार
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए - दुष्यन्त कुमार
तू भी है राणा का वंशज फेंक जहां तक भाला जाए - वाहिद अली वाहिद