May 9, 2024

अग्निपथ - हरिवंश राय बच्चन की कविता

अग्निपथ - हरिवंश राय बच्चन की कविता

अग्निपथ - हरिवंश राय बच्चन की कविता वृक्ष हों भले खड़े, हों घने हों बड़े, एक पत्र छांह भी मांग मत, मांग मत, मांग मत, अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ। तू न थकेगा कभी, तू न थमेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी, कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ, अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ। यह महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है, अश्रु, स्वेद, रक्त से लथपथ, लथपथ, लथपथ, अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ। ये भी देखें-