May 9, 2024

आ रही रवि की सवारी - हरिवंश राय बच्चन

आ रही रवि की सवारी - हरिवंश राय बच्चन

आ रही रवि की सवारी - हरिवंश राय बच्चन नव-किरण का रथ सजा है, कलि-कुसुम से पथ सजा है, बादलों-से अनुचरों ने स्‍वर्ण की पोशाक धारी। आ रही रवि की सवारी। विहग, बंदी और चारण, गा रही है कीर्ति-गायन, छोड़कर मैदान भागी, तारकों की फ़ौज सारी। आ रही रवि की सवारी। चाहता, उछलूँ विजय कह, पर ठिठकता देखकर यह- रात का राजा खड़ा है, राह में बनकर भिखारी। आ रही रवि की सवारी। ये भी देखें-