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हरिवंश राय बच्चन
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July 27, 2023
Harivansh rai bachchan ki rachnaye - Patriotic kavitayen in hindi
सुमति स्वदेश छोड़कर चली गई,
स्वतंत्रता प्रभात क्या यही-यही!
अजान आज बंधु-बंधु के लिए,
दिखे अगर कभी मकान में झरन,
रहे न साथ एक साथ जब रहे,
सुदूर शत्रु सेन साजने लगा,
विदेश की कुनीति हो गई सफल,
पहन प्रसून हार हम खड़े हुए,
यही स्वतंत्रता-लता गया लगा,
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Tags:
देशभक्ति कविता,
हरिवंश राय बच्चन
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