मनुष्य के तीन प्रकार - कविता

 

मनुष्य के तीन प्रकार - कविता
मनुष्य के तीन प्रकार - कविता



घटिया होते हैं वो लोग, जो करते हैं सिर्फ लोगों की बात 

खुद की प्रशंसा और दूसरों की बुराई मे, खपाते अपने दिन और रात 

हर घटिया खबर इनको होती है, लोकल चैनल के रूप में ये विख्यात 

उथले खानदान का पता चलता है, मिनटों में बदलते हैं इनके जज्बात 

आज जो अच्छा है कल वह बुरा हो जाता है, सोच समझ कर रहे इनके साथ


दूसरे होते सामान्य, आमजन, जो लोगों पर नहीं घटनाओं पर करते मनन

अपडेट स्वयं  रहते हैं, रखते दूसरों को भी, देश दुनिया का करते चिंतन 

करना बहुत कुछ चाहते हैं, पर विचार शून्यता से सुलझती नहीं उलझन

बहुतायत में है यह औसत वर्ग, पर परिस्थिति जन्य इनका पतन या उन्नयन 


श्रेष्ठ संपूर्ण और महान व्यक्ति का, है एक तीसरा प्रकार 

जो विचारों को दे प्रमुखता, और विचारों पर ही सिर्फ करें विचार

विचार जैसे राष्ट्रीयता, भाषा, धर्म ,अहिंशा, पर्यावरण या परोपकार 

महत्व है बस इन्हीं मुद्दों का, इनसे ही हम रखें सरोकार 

माना की उम्र गुजर रही है,या गुजर चुकी, पर नई पीढ़ी को दें यही संस्कार 

अच्छे अधिकारी बनने से ज्यादा, अच्छे इंसान की उनसे रखे दरकार 


इन तीनो प्रकारों से हम संचालित, इनके सम्मिश्रण का ही है प्रतिरूप इंसान 

जिसमें, जिस की ज्यादा मात्रा, वैसा उसका हम करते बखान

देत्यत्व और देवत्व मे अंतर पैदा करते हैं, संस्कृति के यह तीन पायदान 

देवता बनने की कोई ख्वाहिश नहीं हमारी, पर बने कम से कम अच्छे इंसान 

न्यून से उच्च पर पहुंचने की कोशिश में, चौबीसों घंटे हम लगाएं ध्यान 

प्रयास रखें सकारात्मक अपना, ईश्वर स्वयं होंगे मेहरबान

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